WHO Full Form In Hindi – WHO क्या है

WHO यह नाम हमारे लिए नया नहीं है, और अभी कोरोना काल में तो यह नाम काफी चर्चा में भी रहा था पर क्या आप जानते हैं , कि WHO Full Form In English क्या है ? , WHO Full Form In Hindi , WHO In Hindi क्या है ? WHO कब बना था, और इसके बनने के पीछे क्या उद्देश्य थे ? साथ ही, यह कहां स्थित है, इसके मुख्य कार्य क्या है और इसमें कितने देश शामिल हैं ?

नहीं जानते , तो चलिए आज के इस आर्टिकल में हम इन्हीं कुछ सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं और WHO के विषय में संपूर्ण और आवश्यक जानकारी प्राप्त करते हैं। साथ ही अंत में हम ये भी जानेंगे , कि कोरोना काल में WHO  क्यों चर्चित हुआ।

WHO Full Form In Hindi, WHO Full Form In English

WHO की फुल फॉर्म है ” World Health Organisation ” . जिसे हम हिंदी में कहेंगे, ” विश्व स्वास्थ्य संगठन “। यह एक सबसे बड़ा स्वास्थ्य संगठन है।

WHO या विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना कब और कहां हुई थी ?

WHO यानि World Health Organisation की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी। WHO की पहली बैठक 24 जुलाई 1948 को हुई थी। Andrija stampar इस सभा के निर्विवाद चुने गए , पहले अध्यक्ष थे और Brock Chisholm, विश्व स्वास्थ्य संगठन के पहले डायरेक्टर जनरल बने थे।

WHO की स्थापना के पीछे क्या उद्देश्य था ?

इसकी स्थापना के पीछे उद्देश्य यह था कि, विश्व के लोगों को स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधित जानकारी देना और जागरूकता निर्माण करना, जिससे कई गंभीर बिमारियों और महामारियों के संक्रमण से बचा जा सके। WHO की  पहली प्राथमिकता बच्चों तथा महिलाओं का स्वास्थ और उनका पोषण भी थी।



WHO की स्थापना कैसे और क्यों हुई ? And WHO Full Form In Hindi.

जैसा कि हम जानते हैं कि World health organisation का मुख्य उद्देश्य, व्यापक स्तर पर फैली हुई, संक्रामक या असंक्रामक बिमारियों से लोगों को जागरूक करना, उस पर प्रमुखता से ध्यान देना और आवश्यक सहायता प्रदान करना है।

अठारहवीं शताब्दी के अंत से लेकर तो उन्नीसवीं शताब्दी की शुरुआत में कई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन हुए, और इन सम्मेलनों से प्रेरित होकर अनेक स्वास्थ्य संगठन बने थे, जिन्होंने हैजा, प्लेग और पीला बुखार जैसी संक्रामक महामारियों से लडने और निजात पाने के लिए काम किया था।

चुंकि ये सभी स्वस्थ्य संगठन किसी राष्ट्र विशेष तक ही सिमीत थे। इन सभी स्वास्थ्य संगठनों को एकत्रित करके, संयुक्त राष्ट्र संघ ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, ” विश्व स्वास्थ्य संगठन ” या WHO का गठन किया। जो विश्व व्यापी था। धीरे धीरे यह अभियान चलता गया, और चेचक, डिप्थीरिया, तपेदिक पोलियो, टिटनेस जैसी गंभीर बिमारियों के लिए टिके बनाएं गए। परिवार नियोजन, मलेरिया, क्षय रोग, और कुष्ठ रोग को भी नियंत्रित करने के प्रयास किए गए।

स्वास्थ्य संगठन का संविधान 22 जुलाई 1946 को बना, जिस पर 61 देशों ने अपने हस्ताक्षर किए थे, जबकि यह औपचारिक रूप से दो साल बाद यानी 7अप्रेल 1948 को लागू किया गया था। इसलिए 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। अभी विश्व स्वास्थ्य संगठन के 194 सदस्य देश है। भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का सदस्य है। 12 जनवरी 1948 को भारत ने WHO की सदस्यता ग्रहण की। भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय दिल्ली में स्थित है।

WHO या  विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है तथा छः देशों में इसके क्षैत्रिय कार्यालय है। साथ ही 150 देशों में इसके कार्यालय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सभी सभा सदस्य, इसके सदस्य , देशों के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रतिनिधि ही होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महासचिव का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के जो सदस्य होते हैं, उन्ही में से सर्वसम्मति के आधार पर महासचिव का चुनाव किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महासचिव के साथ कई अन्य विशेषज्ञ सलाहकार होते हैं, जो निरपेक्ष और निष्पक्ष रूप से निर्णय लेते हैं।

कोरोना के कठीन समय में भी सबकी नजर या उम्मीद विश्व स्वास्थ्य संगठन से ही है, यह एक ऐसी महामारी है, जिसका इलाज वेक्सीन ही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से हर किसी को इसलिए आशा है, क्योंकि किसी भी महामारी की स्थिति में WHO ने प्रशंसनीय कार्य किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, महामारी और संक्रमण के संभावित कारणों और उनके निवारण पर  ध्यान देकर , विश्व भर के लोगों को उस महामारी के खतरे से बचाता है।

साथ ही डेंगू, मलेरिया, एड्स, केंसर, मधुमेह, हृदय रोग और सांस संबंधी अनेक गंभीर रोगों से बचाव और उपचार हेतु सतत कार्यरत हैं , साथ ही नवजात शिशुओं और बच्चों तथा माताओं का स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, स्वयं की तथा पर्यावरण की स्वच्छता आदि , बिन्दूओं को भी विशेष महत्व दिया जाता है, और समाज में इनके प्रति जागरूकता बढ़ सके और बिमारियां कम से कम फैले। किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति या आपदा के समय में भी विश्व स्वास्थ्य संगठन बिना किसी भेदभाव के सभी देशों का सहयोग करता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन परजीवियों ( बेक्टेरिया) द्वारा फैलने तथा यौन रोगों के लिए भी सजगता से कार्यरत हैं। तंबाकू और धूम्रपान से कई गंभीर बिमारियां होती है। अतः विश्व स्वास्थ्य संगठन तंबाकू और धूम्रपान के विरोध में है और इसका सेवन करने वाले किसी भी कर्मचारीयों को भर्ती नहीं करता है। यह ज्ञात रहे , कि विश्व स्वास्थ्य संगठन में अलग-अलग क्षैत्रो में हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन में चिकित्सा के सभी क्षैत्र से जुड़े हुए विशेषज्ञ होते हैं। जो स्वास्थ्य नितियों और योजनाओं के निर्माण और नियोजन, दवाओं के निर्माण, और अन्य महत्वपूर्ण बातों पर अपनी राय देकर अपनी भूमिका निभाते हैं।

WHO, अपनी निष्पक्षता के लिए जाना जाता हैं। फिर भी समय-समय पर विश्व स्वास्थ्य संगठन पर कई आक्षेप और आरोप लगते आ रहे हैं । नोवल कोरोना महामारी के चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन पर कई आरोप प्रत्यारोप लगे हैं। चीन के वुहान शहर से दुनिया भर में फैली इस  संक्रामक और जानलेवा बीमारी की गंभीरता को न समझते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन के वर्तमान महासचिव Tedros Adhanom पर चीन से सांठ गांठ जैसे कई गंभीर आरोप लगाएं जा रहें हैं।

कहा जा रहा है , कि यदि समय पर गंभीरता दिखाई गई होती , तो यह महामारी इतना विकराल रूप नहीं ले पाती। सही समय पर निर्णय ना लेने, अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह से न निभाने और इतनी गंभीर बीमारी में लापरवाही दिखाने के भी उन पर लगातार आरोप लगते आ रहे हैं। यदि ये आरोप सही हैं , तो थोड़ी सी लापरवाही की वजह से ही यह बीमारी चीन तक ही सीमित नहीं रही और पूरा विश्व इसकी चपेट में आ गया है, और लाखों लोगों ने अपनी जान गंवा दी है।

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